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मैट्रन की नियुक्ति नियमसम्मत-कुलपति Featured

खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में मैट्रन एवं काउंसलर की कथित नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने खैरागढ़ महोत्सव की प्रेस वार्ता में पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी। महोत्सव की सफलता पर चर्चा कर रही कुलपति से जब दैनिक भास्कर संवाददाता ने नियुक्ति पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि जो हुआ है नियम से हुआ है, किसी प्रकार की अवहेलना नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय की तात्कालिक जरूरत के आधार पर यह नियुक्ति की गई है।

 

गर्ल्स हॉस्टल की जरूरत बताकर बचाव कहा—यह संवेदनशील विभाग, योग्य अभ्यर्थी ढूंढना कठिन

 

कुलपति ने बताया कि गर्ल्स छात्रावास में स्वास्थ्य, सुरक्षा और देखभाल की चुनौतियां रोज सामने आती हैं। ऐसे में योग्य, समझदार और पढ़ी-लिखी मैट्रन की तत्काल आवश्यकता थी। उन्होंने कहा—“इतने कम मानदेय में, इतने दूर स्थान पर काम करने योग्य अभ्यर्थी ढूंढना आसान नहीं है। जिसे नियुक्त किया गया है, उसे खोजने में हमें काफी प्रयास करना पड़ा।

 

पूर्व मैट्रन पर गंभीर आरोप, किराया, कबाड़ और बच्चों से सफाई कराने तक के आरोप दोहराए

 

सफाई देते हुए कुलपति ने पूर्व मैट्रन पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व पदस्थ मैट्रन अपनी ड्यूटी के दौरान अपने बच्चों के साथ हॉस्टल में रहती थी, छात्राओं से अपने बच्चों का टॉयलेट साफ करवाती थी, दो कमरे का किराया खुद रखती थी और छात्रावास का कबाड़ बेचकर लगभग 50,000 रुपये खुद ले लेती थी। कुलपति ने दावा किया—आज हॉस्टल में डॉक्टर नहीं है, हेल्पर नहीं है, फिर भी वर्तमान मैट्रन तीन-तीन जिम्मेदारियां निभा रही है। आधी रात को भी बच्चियों को अकेले डॉक्टर तक लेकर जाती है।

 

विज्ञापन पर सवाल का सीधा जवाब कुलपति बोलीं—स्थायी पद नहीं, इसलिए विज्ञापन आवश्यक नहीं

पत्रकारों ने पूछा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया के तहत हुई है तो विज्ञापन जारी क्यों नहीं किया गया? इस पर कुलपति ने कहा—डेली वेज कैटेगरी की नियुक्ति में विज्ञापन अनिवार्य नहीं होता। यह स्थायी पद नहीं है, जरूरत खत्म होगी तो नियुक्ति भी समाप्त हो जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि नियुक्ति को आगामी बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। शोधार्थी संबंध को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने जवाब दिया कि थीसिस स्थानांतरण विश्वविद्यालय के हित में किया गया है, नियुक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है।

 

विवाद थमने के बजाय और बढ़ा

एबीवीपी के आरोपों और कुलपति की सफाई के बाद हलचल तेज

 

एबीवीपी ने सोमवार को बिना विज्ञापन, बिना चयन समिति और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौंपा था। कुलपति की सफाई के बाद भी विवाद थमता नहीं दिख रहा, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों में हलचल और बढ़ गई है।

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