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खैरागढ़ में छत्तीसगढ़ बंद का व्यापक असर:आमाबेड़ा घटना के विरोध में सर्व समाज का प्रदर्शन, शहर की दुकानें बंद, दोषियों पर कार्रवाई की मांग Featured

कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में जनजातीय समाज पर कथित हमले, जबरन शव दफन और प्रशासनिक भूमिका के विरोध में बुधवार को खैरागढ़ जिला मुख्यालय में छत्तीसगढ़ बंद का व्यापक असर देखा गया। इस दौरान सर्व समाज के लोगों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

सुबह से ही शहर की सभी छोटी-बड़ी दुकानें स्वस्फूर्त बंद रही। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। बंद के समर्थन में सर्व समाज के लोगों ने स्थानीय अंबेडकर चौक पर धरना दिया। इसमें बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों, जनजातीय प्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया।

जनजातीय समाज ने धार्मिक स्वतंत्रता पर हमले को गंभीर बताया

प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कांकेर के आमाबेड़ा में हुई घटना को गंभीर और सुनियोजित बताया गया। इसमें कहा गया कि यह जनजातीय समाज की धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक गरिमा और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इस घटना में ईसाई मिशनरी समूहों और भीम आर्मी से जुड़े तत्वों की संगठित भूमिका सामने आई है, जिससे प्रदेश में सामाजिक सौहार्द और संतुलन को नुकसान पहुंच रहा है। यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसी घटनाएं पहले भी प्रदेश के विभिन्न इलाकों में हो चुकी हैं, जिससे सर्व समाज में असुरक्षा और आक्रोश बढ़ रहा है।

जनजातीय समाज ने ज्ञापन के जरिए कार्रवाई की मांग की

सर्व समाज ने मुख्यमंत्री से पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें राज्य में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को सख्ती से लागू करना, आमाबेड़ा प्रकरण के सभी आरोपियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करना, कांकेर के पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराना, शव दफन प्रकरण में कथित पक्षपात के आरोपों को लेकर एसडीएम और तहसीलदार को निलंबित करना तथा जनजातीय ग्रामीणों पर दर्ज आपराधिक प्रकरणों को निरस्त कर पीड़ितों को मुआवजा देना शामिल है।

कार्रवाई न हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी दी

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यह आंदोलन किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान, कानून के शासन, जनजातीय आस्था और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए है। सर्व समाज ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक दायरे में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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