खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा एक बार फिर आरोपों के कठघरे में हैं। सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय में चल रही कथित अनियमितताओं, मनमानी और फर्जी नियुक्तियों के विरोध में जिलाधीश के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि एशिया का पहला संगीत विश्वविद्यालय आज अपनी गरिमा नहीं, बल्कि विवादों के कारण सुर्खियों में है।
एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री अमन बृज नामदेव ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मानदेय/मानसेवी नियुक्तियों पर स्पष्ट रोक के बावजूद कुलपति ने अपनी ही शोधार्थी अंजलि कुमारी को मनोवैज्ञानिक काउंसलर एवं सह हॉस्टल मैट्रन के रूप में नियुक्त कर 25,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय तय कर दिया है। नियुक्ति न तो विज्ञापन के माध्यम से की गई और न ही चयन समिति गठित हुई—एबीवीपी ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन और हितों का टकराव बताते हुए विश्वविद्यालय की आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन कहा।
एबीवीपी ने यह भी याद दिलाया कि वर्तमान कुलपति को पहले राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय, ग्वालियर से धारा 57 के तहत गंभीर अनियमितताओं पर हटाया गया था। बावजूद इसके उन्हें खैरागढ़ विश्वविद्यालय में नियुक्त किया गया, और जॉइनिंग भी अवकाश दिवस (रविवार) को कराई गई, जो प्रशासनिक नियमों के विपरीत है। परिषद का कहना है कि यह संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े करती है और विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है।
परिषद ने तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि शासन ने कार्रवाई नहीं की तो खैरागढ़ की अस्मिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गुलशन भगत, नगर मंत्री ऋतिक कंडरा, सहमंत्री हर्ष वर्मा, उत्कर्ष बघेल और अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
नियुक्ति की गई है प्रक्रिया के तहत की गई है लेकिन विज्ञापन जारी नहीं किया गया था।
सौमित्र तिवारी, रजिस्टार इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़