खैरगढ़ :- खैरागढ़ विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा के गृह ग्राम देवारीभाठ में दिनांक 11 जनवरी से 19 जनवरी तक सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय उद्देश्य को लेकर अपने विधानसभा क्षेत्र के करोना काल में काल कवलीत हुए समस्त दिव्य आत्माओं के मोक्षार्थ शांति के लिए श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का नौ दिवसीय आयोजन किया जा है, श्री 108 ब्रह्मलीन पंडित चैतन्य राम गोस्वामी जी महाराज ( डोंगरगांव ) के आशीष मार्गदर्शन में उनके सुपुत्र पंडित विनोद बिहारी गोस्वामी के मुखारवृंद से उपस्थित भक्तों ने श्रवण किया। रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र का अनुपम वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा की पत्नि सुशीला ने अपने पति से कहा कि तुम अपने मित्र द्वारकाधीश से मिलने जाओ जिससे इस द्ररिद्रता का निवारण हो सके और उन्होने पडोस से तीन मुठ्ठी चावल भेंट स्वरूप अर्पित करने के लिये दिये असहवेदना और अधिक परिश्रम करके सुदामा श्री कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी पहुंचे। जहां तीन मुठ्ठी चावल की भैंट श्री कृष्ण ने अथाह प्रेम एवं ममता पूर्ण स्नेह से अंगीकार कर दो मुठ्ठी सुखे ही स्वाद से खाने लगे शेष एक मुट्ठी चावल के लिये जैसे ही उन्होंने हाथ बढाया तभी पटरानी रुक्मणी जी ने अपने लिये भी प्रसाद स्वरूप याचना की। जिसके बदले में श्रीकृष्ण ने सुदामा को दरिद्रता दूर कर धनवान बना दिया। इस दौरान आपस के मिलन का भावपूर्ण चित्रण सुनाया। श्रीकृष्ण ने अपने आसूंओं से सुदामा के चरण धोए और अच्छे कपडे पहनाकर ऊंचे आसन पर बैठाया।
पंडित श्री गोस्वामी ने कहा कि भगवान के दरबार में अमीर और गरीब का भेद नहीं होता है। भगवान के बाल सखा सुदामा गरीब थे, लेकिन उनका एक-दूसरे के प्रति अथाह प्रेम और समर्पण था। मानव को भगवान की भक्ति में ऐसा ही समर्पण और प्रेम का भाव लाना चाहिए। उन्होंने गृहस्थ धर्म का पालन करने की सीख देते हुए कहा कि गृहस्थ में रहकर अपने कर्तव्यों की पालन करें। साथ ही भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भगवान की भक्ति के लिए संन्यास लेना या अन्य तरह के तरीकों की जरूरत नहीं है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी भौतिक मोह माया से निर्लिप्त रह कर भक्ति करने की कला बढ़ा योग है। कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के अलावा सुदामा चरित्र का प्रसंग विस्तार से सुनाया। इसके बाद रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। आगे की कथा का वाचन करते हुए कहा की श्रीकृष्ण से प्रेम देवी रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थी। रुक्मिणी अपनी बुद्धिमता, सौंदर्य और न्यायप्रिय व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थीं। रुक्मिणी जी का पूरा बचपन श्रीकृष्ण की साहस और वीरता की कहानियां सुनते हुए बीता था। रुक्मणी की भगवान के प्रति लगन, आस्था और उनकी इच्छा के चलते भगवान ने उनका वरण किया। कथा के समापन के मौके पर शकुंतला साहू संसदीय सचिव छतीसगढ़ शासन, विनोद ताम्रकार, गिरिवर जंघेल मोती लाल जंघेल, विप्लव साहू व जनप्रतिनिधियों के साथ भक्तों की भीड़ उमड़ी।
रुक्मणी विवाह मे भक्तों ने पखारे पैर और सुदामा चरित्र पर आंखे हुयी नम