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हिरण का शिकार कर भोगा वनवास, लौटकर रचाया ब्याह, फिर वैराग्य लिया और पत्नी को मां बोलकर मांगी भिक्षा

भरथरी एक लोक गाथा: महोत्सव में रंग सरोवर के कलाकारों ने सुमधुर लोक धुनों पर रोचक प्रस्तुति दी। इसमें सिसकते दाम्पत्य की विरह वेदना और त्याग, तपस्या व दृढ़ संकल्प का प्रखर उज्जवल भाव दिखाया।

 

 

गिड़गिड़ाती रही हिरणी: तीर-कमान लेकर काले हिरण का शिकार करने निकले राजा भरथरी को रोकने हिरणी गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वह नहीं माने। हिरण को मारने के बाद उसे बाबा गोरखनाथ के आश्रम लेकर गए। फिर बाबा के कहने पर पश्चाताप करने वनवास भोगा।

खैरागढ़ महोत्सव

 

 

 

राजकुमारी से रचाया ब्याह: वनवास से लौटने के बाद दूसरे देश की राजकुमारी से ब्याह रचाया। रात को सोने की पलंग टूटी तो रानी हंसी। राजा भरथरी ने इसका राज पूछा। वह नहीं बताई। तीन दिन बाद रानी की मौत हो गई।

खैरागढ़ महोत्सव

 

 

 

मां कहा तो छूट गई थाल: सात जन्म बाद जब राजा को पता चला कि पत्नी ही पूर्व जन्म में उसकी मां थी तो उसने वैराग्य ले लिया। बाबा की शर्त पर अपने ही घर में भिक्षा मांगने गया और जैसे ही उसने पत्नी को मां बोलेकर भिक्षा मांगी, रानी के हाथ से थाल छूट गई।

भरथरी एक लोक गाथा

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Last modified on Thursday, 09 January 2020 12:03

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